पलों के छोटे कदमों ने,
महीनों के पंख लगा कर,
आज सालों की उड़ान पकड़ी है।
सालगिरह के पहले पड़ाव पर,
इतनी सी दुआ हम सब की है।
प्रभु कृपा की नजर बनी रहे,
खुशियों से झोलियां भरी रहें।
फूलों से महकता आंचल हो,
सुखों का बरसता सावन हो।
निश्छल हृदय मानो दर्पण हो,
प्रेम की परिभाषा समर्पण हो।
धन वैभव से घर भरा रहे,
हर्षोल्लास से मन हरा रहे।
कृष्ण हो सारथी ग्रहस्थ रथ के,
हनुमंत हो कवच जीवन पथ के।
दुआ है उस मालिक के चरणो में,
आस्था से ना कभी किनारा हो।
हर मोड़ पर तेरा ही सहारा हो,
हर मोड पर तेरा ही सहारा हो।