कल्पना कविता की बुनियाद होती है ,परन्तु मेरी रचनाये किसी कल्पना से नहीं मेरे जीवन के यथार्थ से जुडी है | सुख दुःख के मोतिओं को पिरो कर बनी ये माला आपकी नज़र
भक्ति चाहिये तो विश्वास करो , मुक्ति चाहिये तो असंग हो जाओ ,दुख निवारन चाहिये तो त्याग अपनाओ चिर-शांति चाहिये तो निष्काम हो जाओ और संसारिक विकास चाहिये तो कर्तव्य -परायण हो कर मिले हुए का सदुपयोग करो