Monday, 14 November 2016

वक्त (Time)

वक्त की बही तुम्हारे पलो का हिसाब
हर पल को जीआ है तुमने मेरी खुशियो की खातिर
फिर भी मैं कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नहीं देती

पो फटने के साथ ही शुरू हो जाता है वक्त को पीछे छोड़ने का संघर्ष
खुद को भूल जाती हो बच्चो को हर शै याद दिलाने की खातिर
फिर भी मैं कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नही देती

घर आँगन में फैली तुम्हारी जलाई अगरबत्ती की सुगंध
बता जाती है उन दुआओ के बारे मे जो मांगी होती है परिवार की खातिर
फिर भी मै कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नही देती

ताकत तो इतनी नहीं होती उस चाय के एक कप में
बेफिक्र रहती हो फिर भी तुम खुद से , सब की भूख मिटाने की खातिर
फिर भी मै कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नही देती

आईना दिखाई देता है तेरी खूबसूरती का घर की हर चीज  के अन्दर
क्योंकि दिल की हर कलाकृति उतार देती हो मेरे घर को स्वर्ग बनाने की खातिर
फिर भी मै कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नही देती

उलझनो के ढेर पर बैठ जब तेरी मुस्कराहटो की छाॅव ढुढता हूँ
अपनी सारी थकावट को आँचल में छुपा लेती हो मेरे लिए मुस्कान बिछाने की खातिर
फिर भी मै कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नही देती

ढलते ही रात , मेरे बालो को सहलाते हुई तुम्हारी ऊँगलियाॅ ये कह जाती है
केवल वक्त ही नही , सम्पूर्णता को अर्पित किया था मैने इक वचन की खातिर
वक्त से तो मैने कभी मोहलत भी नही मांगी कि सोचे किसी और की खातिर
अहसास होता है तब बात सुन तेरी, इक ग्लानि सी होती है मन में
सोचता हुॅ
मै क्यों कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नही देती
मै क्यों कहता हुॅ कि तुम मुझे वक्त नही देती

Thursday, 2 June 2016

फूल। 27/7/98

तेरी फुलां दी फुलवारी,
                                      मेरा बुटा खाली

के इक फुल गुलाब दा , ला दे मेरी वी ड़ाली

धोवां हंझुआ नाल तेरी ड़िओड़ी,
                                   बँन बँन मैं सवाली

के इक फुल गुलाब दा , ला दे मेरी वी ड़ाली

रोक ना पावां उम्र सारी,
                        इनां चंम्बे दीयां चिड़िया नुं
सखणी झोली सुन्ड़ा वेह्ड़ा ,
                        सुहांदा नई तेरे बच्चिआ नुं
चंगा लगणा नई जदो खाली रह जु
                     मेरी रोटी तेरी पुजा दी थाली
के इक फुल गुलाब दा , ला दे मेरी वी ड़ाली

पुत होंदिआ वी वड़े वड़े
                      पुतां तों ओल्हे रह गए सी
शरवन दे मापे वी
               शरवन शरवन करदे रह गए सी
राम दे होंद्आ वी तां
           दशरथ नुं लोकी चक के लै गए सी
नां तां नां सही इक दिया ना जगिया
                         तेरी दुनिया तां है उजारी
इक जी जे ना आया जग विच
                नहीं हो जाणी इह चंदरी खाली
अरमान इको रह जाएगा
            सवास छड़ण लगिआ
नहीं कहेगा कोई मेरी बच्चिआ नुं वीरावाली

के इक फुल गुलाब दा , ला दे मेरी वी ड़ाली
के इक फुल गुलाब दा , ला दे मेरी वी ड़ाली

Wednesday, 1 June 2016

आफताब 20/2/92

तेरी तस्वीर में तुझे देखकर युॅ लगा
  ये वो नहीं,जिसे पहले मैंने देखा है
गजब की आफताब है कोई,
                         जिसे मैंने देखा है

क्या जिक्र करु तेरी तस्वीर का
                     तेरे ही आगे ऐ सनम
सोचता हुॅ कहाॅ से शुरु करु
              अफसाना तेरी तस्वीर का
जिधर घूमती है नजर
यही सवाल उठता है दिल में
                          इसे कहीं देखा है
गजब की आफताब है कोई,
                         जिसे मैंने देखा है

शरारत भरी ये निगाहें
जो नजर मिलाते ही शरमा जाती है
अठखेलियाँ करती एक महीम सी बिंदिया
       जो कभी-कभी नजर आती है
तेरे माथे पर फिर ढुढता हुॅ इसको
क्योंकि पहले भी मैंने इसे यही देखा है
गजब की आफताब है कोई,
                         जिसे मैंने देखा है

मुस्करा देने को आतुर
                  ये होठ तेरे लरजाये हुए
एक मिठास तेरे चुम्बन की
               दामन में अपने छुपाऐ हुए
इक अदा छुपी है चहकने की तेरी इनमे
   नही दोनो जहाँ में, जिसे कहीं देखा है
गजब की आफताब है कोई,
                         जिसे मैंने देखा है

लिखने को तो बहुत कुछ है
                             पर शब्द नही है
चाँद कहुँ गर तेरे चेहरे को
         पर उसमें भी कुछ खास नहीं है
तेरी तस्वीर को मिलने से
                     पहले भी कहीं देखा है
गुजरे जब भी हम अपने दिल की दहलीज से
                         हाँ इसे वहीं देखा है
गजब की आफताब है कोई,
                         जिसे मैंने देखा है


Tuesday, 3 May 2016

मेरा राजदुलारा (My Sweet Son)

नभ में जो था चांद से सुन्दर,
               हंसता हुआ एक सितारा
भेजा है रब ने उसको,
                बना कर मेरा राजदुलारा

मथुरा का था बंसीवाला,
गोकुल का था वो ग्वाला

भेजा है रब ने उसको,
                बना कर मेरा राजदुलारा

मासूम सी तेरी बोली,
                 खुशियों से भर देती झोली
तेरा बात बात पे मुस्काना,
                 मेरे जीने का है बहाना

बने तू सबकी आंख का तारा
बने तू सबकी आंख का तारा

इसलिए ,भेजा है रब ने तुझको
                 बना कर मेरा राजदुलारा

पढलिख कर तु महान बनना,
                  देश की तु शान बनना
सच्चाई के पथ पर चल कर,
                   हर मुश्किल आसान करना
हो तुझसे इक नया उजियारा,
हो तुझसे इक नया उजियारा,

इसलिए ,भेजा है रब ने तुझको
                 बना कर मेरा राजदुलारा

हर  दुआ है मेरी साथ तेरे,
                 तु सब सपने अपने साकार करना
आज उंगली पकड कर चले हो,
         कल बाॅह पकड कर चलना

बनना कल तु मेरा सहारा
बनना कल तु मेरा सहारा

इसलिए ,भेजा है रब ने तुझको
                 बना कर मेरा राजदुलारा
इसलिए ,भेजा है रब ने तुझको
                 बना कर मेरा राजदुलारा

Thursday, 21 April 2016

मेरी मम्मी

मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,
मुझे मम्मी से प्यारा कोई नहीं और,
मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,

भूख न हो तो मार मार खाना खिलाती है
भूख हो तो खिलाना भूल जाती है
मेरी मम्मी सा न्यारा कोई नहीं और,
मुझे मम्मी से प्यारा कोई नहीं और,
मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,

रुठू मैं तो बार बार मनाती है
खुद रुठे तो इक बार में मान जाती है
मेरी मम्मी सा भोला  कोई नहीं और,
मुझे मम्मी से प्यारा कोई नहीं और,
मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,

कहानी सुना सुना मुझे बहादुर बनाती है
खुद कॉकरोच से ड़र के भाग जाती है
मेरी मम्मी सा ड़रता कोई नहीं और,
मुझे मम्मी से प्यारा कोई नहीं और,
मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,

पढु नहीं तो गुस्सा दिखाती है
काम कर लुं सारा तो गले से लगाती है
इनके प्यार से प्यारा कोई नहीं और,
मुझे मम्मी से प्यारा कोई नहीं और,
मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,

मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,
मुझे मम्मी से प्यारा कोई नहीं और,
मेरी मम्मी से अच्छा कोई नहीं और,