Thursday, 24 July 2025

क्या करे( what I do)

भक्ति चाहिये तो विश्वास करो , मुक्ति चाहिये तो असंग हो जाओ ,दुख निवारन चाहिये तो त्याग अपनाओ चिर-शांति चाहिये तो निष्काम हो जाओ और संसारिक विकास चाहिये तो कर्तव्य -परायण हो कर मिले हुए का सदुपयोग करो

Tuesday, 12 November 2024

सर्दी (Winter )On Payal's Germany vist

 तुम सर्दी आने से पहले चले आना

मैं तो जैसे रह रहा था वैसे रह रहा हूं

ये तो मैं तुम्हारे लिए कह रहा हूं 

कि तुम सर्दी आने से पहले चले आना


सर्द हवाएं वहां की शायद तुम्हे खलने लगी हो

गर्म कपड़ों की जरूरत अब ज्यादा पड़ने लगी हो

बिना आग के चाय शायद अब ठंडी लगने लगी हो

मैं तो जैसे रह रहा था वैसे रह रहा हूं

ये तो मैं तुम्हारे लिए कह रहा हूं 

कि तुम सर्दी आने से पहले चले आना


यहां सूरज भी शाम को जल्द ढलने लगा है

बाथरूम में नारियल के तेल अब जमने लगा है 

दूसरे घरों में साग भी अब बनने लगा है

मैं तो जैसे रह रहा था वैसे रह रहा हूं

ये तो मैं तुम्हारे लिए कह रहा हूं 

कि तुम सर्दी आने से पहले चले आना



कपड़ो के लिए अब ऑटोमैटिक मशीन ले ली है

बर्तन के लिए भी अब गीजर लगवा रहे हैं 

खाना गरम करने के लिए अब ओवन भी ला रहे हैं

मैं तो जैसे रह रहा था वैसे रह रहा हूं

ये तो मैं तुम्हारे लिए कह रहा हूं 

कि तुम सर्दी आने से पहले चले आना


ऐसा नहीं है कि मेरा मन नहीं लगता

मैं क्या तुम्हारी मजबूरी नहीं समझता 

कम तो कर लिया है मैने जरुरतों को

इच्छाओं से तो हर रोज रहता हूँ उलझता

तुम पास हो हर पल मेरे, 

मत समझना दूरी सह नहीं सकता 

फिक्र न करो तुम मेरी,

मैं तो जैसे रह रहा था वैसे रह रहा हूं

ये तो मैं तुम्हारे लिए कह रहा हूं 

कि तुम सर्दी आने से पहले चले आना

कि तुम सर्दी आने से पहले चले आना

कि तुम सर्दी आने से पहले चले आना













Friday, 30 October 2020

होशियारी(Smartness)

टूटते तारे की बुझती हुई लौ में,
देखने वालों ने चिंगारी देखी
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,
झूठ ना कह पाया कभी,
ना तोङा दिल कभी किसी का,
फिर भी मुझमें मेरे अपनो ने मक्कारी देखी,
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,

झुकती रही कमर,
जिन्दगी के बोझ से
झुकती रही नजर,
अहसानों के बोझ में,
मेरी खामोशी में भी अपनो ने जुबांतरारी देखी
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,

कुछ कर गुजरने की उम्मीद में,
न जाने क्या क्या कर गए हम
जिन्दगी में मुकाम हासिल करते करते,
कईओ की नजरों से उतर गए हम
मिल बैठने में भी अब तो लोगो की नागवारी देखी,
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,

टूट गया हूं मैं,
कोई तो आकर संभाले मुझको
चीर कर सीना धरती का,
आंचल में छुपा ले मुझको ,
वज़ह तो न बन पाया किसी के सकूं की,
क़ोई बेवजह ही गले से लगा ले मुझको ।
क़ोई बेवजह ही गले से लगा ले मुझको ।
वफ़ादारी की इंतेहा के बाद जब मिलीं नजरें
उन नजरों में भी न इक पल की शुक्रगुज़ारी देखी ।
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी।
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,






Wednesday, 7 October 2020

50th Marriage Anniversary of Res. papaji Mummy ji

ਤੇਰੇ ਖੱਬ ਨੇ ਦੂਆਵਾ ਦੀ ਛਤਰੀ,
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।

ਤੇਰੇ ਖੱਬ ਨੇ ਦੂਆਵਾ ਦੀ ਛਤਰੀ,
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।

ਤੇਰੇ ਹਥਾਂ ਵਿਚ ਬਚਪਨ ਖੇਡਿਆ,
ਆਚਲ ਵਿੱਚ ਮਾਣੀ ਜਵਾਨੀ।
ਦੂਆ ਤੁਹਾਡੀ ਨਾਲ ਪਰਿਵਾਰ ਵਧਿਆ,
ਪਰ ਤੁਹਾਡੀ ਭੁਲ ਨ ਸਕਾਂ ਕੁਰਬਾਨੀ ।
ਔਖੇ ਵੇਲੇ ਤੁਸੀਂ ਬਾਂਹ ਸਦਾ ਪਕੜੀ,
ਨ ਹੋਣ ਦਿੱਤੀ ਕਦੇ ਕੋਈ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ।
ਸੀਤਾ ਰਾਮ ਸਰੂਪ ਯੁਗਲ ਜੋੜੀ,
ਰੱਬਾ ਏ ਜੋੜੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।

ਤੇਰੇ ਖੱਬ ਨੇ ਦੂਆਵਾ ਦੀ ਛਤਰੀ,
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।

ਹੱਥ ਜੋੜਦੀ ਵੀਰਾਂ ਅੱਗੇ,
ਬੁੱਝੋ ਕਿਊ ਏ ਮੇਲਾ ਹੋਇਆਂ ।
ਸਾਂਝ ਪੈ ਗਈ ਉਮਰਾਂ ਦੀ ਹੁਣ,
ਸੇਵਾ ਦਾ ਇਹ ਵਿਹਲਾ ਹੋਇਆ ।
ਉੱਚਾ ਬੋਲ ਜੇ ਬੋਲ ਵੀ ਦੇਣ ਤਾਂ ,
ਤੁਸਾਂ ਨਾ ਕੌੜਾ ਬੋਲਿਔ ।
ਕਬੀਲਦਾਰੀ ਦੇ ਆਣੇ ਜਾਣੇ,
ਰਲਮਿਲ ਆਪ ਨਿਭਾਲਿਔ।
ਧਰਮ ਕਰਮ ਵਿੱਚ ਧਿਆਨ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਲੱਗੇ
ਏਸੇ ਵਸੀਲੇ ਤੁਸੀਂ ਬੜਾਇਔ ।

ਏਹ ਨੇ ਵੇਹੜੇ ਵਿੱਚ ਬੋਹੜ ਦੀ ਛਾਂ,
ਰੱਬਾ ਏਹ ਛਾਂ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।

ਤੇਰੇ ਖੱਬ ਨੇ ਦੂਆਵਾ ਦੀ ਛਤਰੀ,
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।

ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।

ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।



तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी

बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे

तेरा आंचल जीवें सावण दी बदरी
माऐ  तेरी बदरी सदा बनी रहे
तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी
बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे
तेरा आंचल जीवे सावण दी बदरी
माऐ  तेरी बदरी सदा बनी रहे

तेरे हथां विच बचपन खेङिआ
आंचल विच माढी जवानी
दूआ तुहाङी नाल परिवार वधिआ
पर तुहाङी भुल न सकां कुर्बानी
औखे वेले तुसी बांह सदा पकङी
न हौन दित्ती कदे परेशानी

सीताराम सरूप युगल जौङी
रब्बा ऐ जौङी सदा बनी रहे
तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी
बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे


हथ जौङदी वीरां अगे
बुझौ क्यु ऐह मेला होईआ
सांझ पै गई उमरां दी हुन
सेवा दा एह वेहला  होईआ
ऊच्चा बोल जे बोल वी देन तां
तुसा ना कौङा बोलिओ
कबीलदारी दे आढे जाढे
रलमिल आप निबेङिईओ
धरमकरम विच धिआन ईनां दा लगे
ऐसा वसीला बङाईऔ

ऐह ने वेहङे विच बोहढ दी छांव
रब्बा ऐह छां सदा बनी रहे
तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी
बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे

Monday, 11 May 2020

Lokniti first anniversary



पलों के छोटे कदमों ने,

महीनों के पंख लगा कर,

आज सालों की उड़ान पकड़ी है।

सालगिरह के पहले पड़ाव पर,

इतनी सी दुआ हम सब की है।

प्रभु कृपा की नजर बनी रहे,

खुशियों से झोलियां भरी रहें।

फूलों से महकता आंचल हो,

सुखों का बरसता सावन हो।

निश्छल हृदय मानो दर्पण हो,

प्रेम की परिभाषा समर्पण हो।

धन वैभव से घर भरा रहे,

हर्षोल्लास से मन हरा रहे।

कृष्ण हो सारथी ग्रहस्थ रथ के,

हनुमंत हो कवच जीवन पथ के।

दुआ है उस मालिक के चरणो में,

आस्था से ना कभी किनारा हो।

हर मोड़ पर तेरा ही सहारा हो,

हर मोड पर तेरा ही सहारा हो।

Friday, 10 January 2020

फरियाद 14/9/1999

फटिया कलेजा मेरा फेर वी मैं रोई ना,
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना

खेडढ नुं खिडोढे दित्ते,
दित्ता न वीर ऐ
खेडी कली खिडोढेयाँ नाल,
कादी मेरी तकदीर है
लकिरां दियां गुझलां विच,
मेरे वीर दी लकीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना

तरले तां बहोते पाऐ,
कीतियां ने मिन्नतां बथेरियां
सच्ची जे मां तू होन्दी,
भर जांदियां अखां ऐ तेरियां
पर बुतां दिआ अखां विचों ,
वगिया कदि नीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना

मापे मेरे आखदे,
धीआं पुतां समान हैं
फिर वी धिआं छड जांदियां,
कैसा ऐह विधान है
मैं ना जावां छड मापे,
मेरे ते ज़माने दी जंजीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना

जान दी जे कमी होऐ,
मेरी जान मंग लै
रुह जे कम्म आंदी होऐ,
मेरी रुह कढ लै
वीर बनदा होऐ जे मेरे बाझो,
तां मेरे वरगी तकदीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना

फटिया कलेजा मेरा फेर वी मैं रोई ना,
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना

Thursday, 9 January 2020

कृपादृष्टि

|| प्रभु मैं जानता हूँ आपकी असीम कृपादृष्टि लगातार मेरी और लगी हुई है आप मुझे आशीर्वाद देवें ताकि मैं आपका निरंतर  सिमरन करते हुए उसकी अनुभूति  कर सकूं ||