MY POETRY
कल्पना कविता की बुनियाद होती है ,परन्तु मेरी रचनाये किसी कल्पना से नहीं मेरे जीवन के यथार्थ से जुडी है | सुख दुःख के मोतिओं को पिरो कर बनी ये माला आपकी नज़र
Thursday, 24 July 2025
क्या करे( what I do)
Tuesday, 12 November 2024
सर्दी (Winter )On Payal's Germany vist
Friday, 30 October 2020
होशियारी(Smartness)
देखने वालों ने चिंगारी देखी
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,
झूठ ना कह पाया कभी,
ना तोङा दिल कभी किसी का,
फिर भी मुझमें मेरे अपनो ने मक्कारी देखी,
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,
झुकती रही कमर,
जिन्दगी के बोझ से
झुकती रही नजर,
अहसानों के बोझ में,
मेरी खामोशी में भी अपनो ने जुबांतरारी देखी
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,
कुछ कर गुजरने की उम्मीद में,
न जाने क्या क्या कर गए हम
जिन्दगी में मुकाम हासिल करते करते,
कईओ की नजरों से उतर गए हम
मिल बैठने में भी अब तो लोगो की नागवारी देखी,
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,
टूट गया हूं मैं,
कोई तो आकर संभाले मुझको
चीर कर सीना धरती का,
आंचल में छुपा ले मुझको ,
वज़ह तो न बन पाया किसी के सकूं की,
क़ोई बेवजह ही गले से लगा ले मुझको ।
क़ोई बेवजह ही गले से लगा ले मुझको ।
वफ़ादारी की इंतेहा के बाद जब मिलीं नजरें
उन नजरों में भी न इक पल की शुक्रगुज़ारी देखी ।
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी।
ना थी जो कभी मुझ में,
मेरे अपनो ने वो मुझ में होशियारी देखी,
Wednesday, 7 October 2020
50th Marriage Anniversary of Res. papaji Mummy ji
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।
ਤੇਰੇ ਖੱਬ ਨੇ ਦੂਆਵਾ ਦੀ ਛਤਰੀ,
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।
ਤੇਰੇ ਹਥਾਂ ਵਿਚ ਬਚਪਨ ਖੇਡਿਆ,
ਆਚਲ ਵਿੱਚ ਮਾਣੀ ਜਵਾਨੀ।
ਦੂਆ ਤੁਹਾਡੀ ਨਾਲ ਪਰਿਵਾਰ ਵਧਿਆ,
ਪਰ ਤੁਹਾਡੀ ਭੁਲ ਨ ਸਕਾਂ ਕੁਰਬਾਨੀ ।
ਔਖੇ ਵੇਲੇ ਤੁਸੀਂ ਬਾਂਹ ਸਦਾ ਪਕੜੀ,
ਨ ਹੋਣ ਦਿੱਤੀ ਕਦੇ ਕੋਈ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ।
ਸੀਤਾ ਰਾਮ ਸਰੂਪ ਯੁਗਲ ਜੋੜੀ,
ਰੱਬਾ ਏ ਜੋੜੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।
ਤੇਰੇ ਖੱਬ ਨੇ ਦੂਆਵਾ ਦੀ ਛਤਰੀ,
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।
ਹੱਥ ਜੋੜਦੀ ਵੀਰਾਂ ਅੱਗੇ,
ਬੁੱਝੋ ਕਿਊ ਏ ਮੇਲਾ ਹੋਇਆਂ ।
ਸਾਂਝ ਪੈ ਗਈ ਉਮਰਾਂ ਦੀ ਹੁਣ,
ਸੇਵਾ ਦਾ ਇਹ ਵਿਹਲਾ ਹੋਇਆ ।
ਉੱਚਾ ਬੋਲ ਜੇ ਬੋਲ ਵੀ ਦੇਣ ਤਾਂ ,
ਤੁਸਾਂ ਨਾ ਕੌੜਾ ਬੋਲਿਔ ।
ਕਬੀਲਦਾਰੀ ਦੇ ਆਣੇ ਜਾਣੇ,
ਰਲਮਿਲ ਆਪ ਨਿਭਾਲਿਔ।
ਧਰਮ ਕਰਮ ਵਿੱਚ ਧਿਆਨ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਲੱਗੇ
ਏਸੇ ਵਸੀਲੇ ਤੁਸੀਂ ਬੜਾਇਔ ।
ਏਹ ਨੇ ਵੇਹੜੇ ਵਿੱਚ ਬੋਹੜ ਦੀ ਛਾਂ,
ਰੱਬਾ ਏਹ ਛਾਂ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।
ਤੇਰੇ ਖੱਬ ਨੇ ਦੂਆਵਾ ਦੀ ਛਤਰੀ,
ਬਾਬੁਲ ਤੇਰੀ ਛਤਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਤੇਰਾ ਆਚਲ ਜਿਵੇਂ ਸਾਵਣ ਦੀ ਬਦਰੀ,
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ ।
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
ਮਾਏ ਤੇਰੀ ਬਦਰੀ ਸਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ।
तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी
बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे
तेरा आंचल जीवें सावण दी बदरीमाऐ तेरी बदरी सदा बनी रहे
तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी
बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे
तेरा आंचल जीवे सावण दी बदरी
माऐ तेरी बदरी सदा बनी रहे
तेरे हथां विच बचपन खेङिआ
आंचल विच माढी जवानी
दूआ तुहाङी नाल परिवार वधिआ
पर तुहाङी भुल न सकां कुर्बानी
औखे वेले तुसी बांह सदा पकङी
न हौन दित्ती कदे परेशानी
सीताराम सरूप युगल जौङी
रब्बा ऐ जौङी सदा बनी रहे
तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी
बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे
हथ जौङदी वीरां अगे
बुझौ क्यु ऐह मेला होईआ
सांझ पै गई उमरां दी हुन
सेवा दा एह वेहला होईआ
ऊच्चा बोल जे बोल वी देन तां
तुसा ना कौङा बोलिओ
कबीलदारी दे आढे जाढे
रलमिल आप निबेङिईओ
धरमकरम विच धिआन ईनां दा लगे
ऐसा वसीला बङाईऔ
ऐह ने वेहङे विच बोहढ दी छांव
रब्बा ऐह छां सदा बनी रहे
तेरे खंभ ने दुआवा दी छतरी
बाबुल तेरी छतरी सदा बनी रहे
Monday, 11 May 2020
Lokniti first anniversary
पलों के छोटे कदमों ने,
महीनों के पंख लगा कर,
आज सालों की उड़ान पकड़ी है।
सालगिरह के पहले पड़ाव पर,
इतनी सी दुआ हम सब की है।
प्रभु कृपा की नजर बनी रहे,
खुशियों से झोलियां भरी रहें।
फूलों से महकता आंचल हो,
सुखों का बरसता सावन हो।
निश्छल हृदय मानो दर्पण हो,
प्रेम की परिभाषा समर्पण हो।
धन वैभव से घर भरा रहे,
हर्षोल्लास से मन हरा रहे।
कृष्ण हो सारथी ग्रहस्थ रथ के,
हनुमंत हो कवच जीवन पथ के।
दुआ है उस मालिक के चरणो में,
आस्था से ना कभी किनारा हो।
हर मोड़ पर तेरा ही सहारा हो,
हर मोड पर तेरा ही सहारा हो।
Friday, 10 January 2020
फरियाद 14/9/1999
फटिया कलेजा मेरा फेर वी मैं रोई ना,
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
खेडढ नुं खिडोढे दित्ते,
दित्ता न वीर ऐ
खेडी कली खिडोढेयाँ नाल,
कादी मेरी तकदीर है
लकिरां दियां गुझलां विच,
मेरे वीर दी लकीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
तरले तां बहोते पाऐ,
कीतियां ने मिन्नतां बथेरियां
सच्ची जे मां तू होन्दी,
भर जांदियां अखां ऐ तेरियां
पर बुतां दिआ अखां विचों ,
वगिया कदि नीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
मापे मेरे आखदे,
धीआं पुतां समान हैं
फिर वी धिआं छड जांदियां,
कैसा ऐह विधान है
मैं ना जावां छड मापे,
मेरे ते ज़माने दी जंजीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
जान दी जे कमी होऐ,
मेरी जान मंग लै
रुह जे कम्म आंदी होऐ,
मेरी रुह कढ लै
वीर बनदा होऐ जे मेरे बाझो,
तां मेरे वरगी तकदीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
फटिया कलेजा मेरा फेर वी मैं रोई ना,
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
सबना नुं वीर दित्ते मेरा वीर कोई ना
Thursday, 9 January 2020
कृपादृष्टि
|| प्रभु मैं जानता हूँ आपकी असीम कृपादृष्टि लगातार मेरी और लगी हुई है आप मुझे आशीर्वाद देवें ताकि मैं आपका निरंतर सिमरन करते हुए उसकी अनुभूति कर सकूं ||