Sunday, 12 October 2014

स्वच्छता

खिलता बचपन, निरोगी संसार
काया सुन्दर, स्वस्थ विचार
छुपा रहस्य समझो इनका, तो अर्थ इक 'सफाई' है |
रखें साफ घर आंगन को हम सब, इसमें सबकी भलाई है ||

जिम्मेदारी न डाले दुसरो पर, अपना काम हम खुद करें
 गंदा गर हुआ है हमसे, साफ भी उसको हम खुद करें
 बात पते की ये हमें, बापू ने बताई है|
रखें साफ घर आंगन को हम सब, इसमें सब की भलाई है||

नारी का सम्मान बढाने को , घर घर में हमारे शौच हो
सुन्दर बने देश हमारा, हम सब की यह सोच हो
मिल कर कदम उठाये ऐसे, लक्षय में जिसके सफाई है |
रखें साफ घर आंगन को हम सब, इसमें सबकी भलाई है ||

साफ रखने की समस्त भारत को, कसम मैं भी लेता हूँ
नहीं करुगा गंदा कुछ भी, ये बात सामने सबके कहता हूँ
देश केसै हो साफ मेरा, ये बातें मम्मी ने मुझे बताई हैं |
रखें साफ घर आंगन को हम सब, इसमें सबकी भलाई है ||
इसमें सबकी.................

Sunday, 8 June 2014

माऐ (Mother) 07/07/95

ना रो तूं मेरे मासूम जिहे चेहरे नू वेख माऐ |
मैं आउणा सी तेरे महलां विच,ऐह सी मेरे लेख माऐ ||
ना रो तूं मेरे.......................................
भरियां अखां वेख तेरिआ, मेरा दिल वी रोन्दा है |
ना बोल सकां फिर वी,तेरा दर्द मैनू वी होन्दा है ||
चीस ना देणी होऐ जे तू मेनू ,तां भरियां अखां नाल ना वेख माऐ ,
मैं आउणा सी तेरे महलां विच ,ऐह सी मेरे लेख माऐ ||
भुख लगेगी तां सो जावांगी हन्झू पी के ,
दुध मंगा तां होसी कसूर मेरा |
भुख लगेगी तां सो जावांगी झिडक खाके ,
रोटी मंगा तां होसी कसूर मेरा |
छोटा न कर दिल अपणा ,कदे न लगसी तेनू ठेस माऐ |
मैं आउणा सी तेरे महलां विच ऐह सी मेरे लेख माऐ ||
नां लाई कदे हिक नाल मेनू ,
पर कुझ दिन मेनू अपणे कोल रह लैण दे |
रूल जाऐगा ऐह बचपन मेरा,
मैनू जरा कु वडा हो लैण दे ||
टोर देई तूं जल्दी मैनू , भावें ना रोई तूं जांदा वेख माऐ |
मैं आउणा सी तेरे महलां विच ऐह सी मेरे लेख माऐ ||
मीट के अखां हुण तां हंझू पी जा माऐ ,
भुल के इक वारी मैनू पवान्दी मेरे तूं सों जा माऐ ,
हुण वी न जांदा होए जे दर्द मेरा ,
गाटा फण के गला घोट चा माऐ ,
बाद मर के वी इही दुआ है रब तों मेरी ,
ऊथे जनम देई जिथे होवें मेरी लौण माऐ ,
भरां देई नीति नूं सोहणा जिहा ,
मेरे वरगी भैण देई ना होर माऐ ,
मैं आउणा सी तेरे महलां विच ऐह सी मेरे लेख माऐ |
ना रो मेरे मासूम जिहे चेहरे नूं वेख माऐ ,
ना रो मेरे मासूम जिहे चेहरे नूं वेख माऐ |||

                                    मम्मी की छोटी बेटी
                पलक
     तारीख-----०७-०७-१९९५

खबर

न गेसू सवारे, न लट सुलझाई
न पहनी नथनिया, न सुरखी़ लगाई
कि उनके आने की खबर उनके आने के बाद आई ||
धूप में यु ही औंधी पडी थी, चुनरी कहीं और चोली कहीं थी ,
आंख बन्द कर ख्वाबो में उनसे मिलने गई थी ,
आहट पर उनकी जो आंख झपकाई ,
सामने उनको पा मैं बहुत शरमाई ,
कि उनके आने की खबर उनके आने के बाद आई
पास आ कर उन्होने पकडी कलाई,
पहले गेसु सवारें फिर चुनरी उठाई,
अपने होठों की सुरखी मेरे होठों पे लगाई,
न कुछ वो बोले न मैं बोल पाई,
आंखो ने आंखो को ये दास्तां सुनाई,
बिन तेरे सजन कैसे बीती जुदाई,
न पलक उनकी झपकी न मेंने झपकाई,
ऐसे में चौखट पे डाक बाबू नें आवाज लगाई,
खत ले उन्होने अपने आने की खबर पढ सुनाई,
मुस्कराये वो तब मेरे होंठो पे हंसी आई,
मजबूरी मेरी तब उनकी समझ में आई,
कि उनके आने की खबर उनके आने के बाद आई |||