तुम पुज्नीय नहीं तो क्या
आदरणीय हो
तुम वन्दनीय नहीं तो क्या
समरणीय हो
तुम उच्च शिक्षित नहीं तो क्या
शिक्षक हो
तुम कामधेनु नहीं तो क्या
अन्नपुर्णा हो
तुम वाचक नहीं तो क्या
पुजारिन हो
तुम माथे की बिंदिया नहीं तो क्या
'पायल' हो
अभिमान हो तुम मेरा
सारे घर का गौरव हो
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