Friday, 16 October 2015

वृंदावन यात्रा से पहले प्रभु से निवेदन ( Varindavan Yatra) 10/11/15

जब मैं आऊ द्वारे तेरे,
प्रभु मुझे तुम अपना लेना |
छवि देख सुदामा की मुझमें,
प्रभु मुझे गले तुम लगा लेना |
             जब मैं आऊ द्वारे तेरे........

अभिलाषा मन में इतनी,
हर आशा में रंग भर देना |
जैसी छवि चाहुँ जहाँ पर,
उसी छवि में तुम दर्शन देना |
           जब मैं आऊ द्वारे ...........

जब मैं जाऊ नन्दगाँव,
बाल रुप तुम धर लेना,
नन्द के पालने में,
मुझे मुस्कराते हुए तुम दर्शन देना |
                 जब मैं आऊ द्वारे तेरे.........

बांके के दर्शन से पहले,
किशोरी के घर जायेंगे,
कैसे रिझते हैं प्रभु तुम पर,
ये पुछकर आयेंगे |
सबकी मटकी फोडने वाले,
पानी तुम्हारा क्यों भरते हैं,
चाकर जिसका जग ये सारा,
वो चाकरी तुम्हारी क्यों करते हैं
बरसाने की हर बाला तुम,
राधा रुप धर लेना,
जब मैं जाऊ मन्दिर राधारानी के,
प्रभु राधा रुप में तुम दर्शन देना |
               जब मैं आऊ द्वारे तेरे..........

मथुरा के कारावास में,
जहाँ अवतार जगधीश लिया,
कृष्ण रुप में लीला का,
जहाँ से तुमने श्री गणेश किया |
निहारु जब तुम्हारी वात्सलयी छटा को,
खोल तुम सारे बंधन देना,
माँ देवकी की गोद में,
सोते हुए तुम दर्शन देना |
                जब मैं आऊ द्वारे तेरे.........

हमको राह दिखाने को

इन्द्र का अभिमान मिटाने को,

धारण किया गिरि को इक अगुली पर

गिरिराज का मान बढाने को,

जीवन जीऊ राह तेरी पर चल कर,

प्रभु ऐसा तुम जीवन देना,

गोवर्धन रुप में परिक्रमा पथ पर,

प्रभु मुझे तुम दर्शन देना |

               जब मैंआऊ द्वारे तेरे...........

गोकुल को जाने के लिए,
मथुरा से जब हम प्रस्थान करें,
यमुना की धार में फिर,
मनमोहनी मुरत का रसपान करें
यमुना जी की तरह इक स्पर्श मात्र से,
शांत हमारा भी मन कर देना,
शेषनाग की छाँव में, वासुदेव की बाहो में,
अठखेलियां करते तुम दर्शन देना
               जब मैं आऊ द्वारे तेरे..........

जब हम पहुंचे गोकुल धाम में,
बाल गोपाल तुम बन जाना,
मुठ्ठी में भर माखन मिश्री को,
अपने हाथ से तुम मुझको खिलाना,
गौ माता की चरणधूली से,
मेरे मस्तक पर लेपन देना,
बांसुरी बजाते ग्वाले रुप में,
गोकुल में तुम दर्शन देना
                जब मैं आऊ द्वारे तेरे...........

 जब मैं पहुंचू धाम वृंदावन

इक बात मुझे तुम बता देना,

क्यो गिरता है परदा घडी घडी

इस बात से परदा उठा देना  |

तुझ को तुझसे चुराने के लिए
नजरो को मिलाना पडता है,
लुट जाते हैं जो अपना सवत्र
संग उनके तुम्हें जाना पडता है|
पड॓ जब आपकी दृष्टि  मेरे ऊपर,
अविलम्ब संग हमारे तुम चल देना,
सावंले हो सांवले रुप में ही,
वृंदावन में तुम दर्शन देना |
                जब मैं आऊ द्वारे तेरे............

कृपा तो है हर पल,
कृपालु आपकी,
दरबार पर जो मैं आया,
ये भी कृपालुता है आपकी |
मेरा तो मुझ में कुछ नही,
अर्पण करु जो आपको,
अब अपनाओ या ठुकरा दो ,
मरजी है आपकी |
अपनाने की सोचो तो,
मेरे अवगुण किनारे कर देना,
गर ठुकराने की सोचो तो ,
मेरे आसूओ को इक बार पढ लेना |
आस और अभिमान मेरा है तुझसे,
देखना कहीं ये धुमिल न हो जाए,
पार करना मेरे आसुओ के सैलाब को,
कही तुम्हारे लिए भी मुश्किल न हो जाए |
रहना है हमारे ह्दय में ,
या हमको ह्रदय में रखना है,
ये फैसला भी प्रभु जी,
अब आपको करना है |
सोचना चाहे कुछ भी,
बस इक बात मेरी तुम रख लेना,
जब समय हो मेरी चिरनिद्रा का,
उस पल  बाहें फलाऐ मुझे तुम दर्शन देना |

उस पल  बाहें फलाऐ मुझे तुम दर्शन देना 

                जब मैं आऊ द्वारे तेरे,
                प्रभु मुझे तुम अपना लेना |
                छवि देख सुदामा की मुझमें,
               प्रभु मुझे गले तुम लगा लेना |
                

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