Thursday, 9 January 2020

तोहफा (Gift) 22/4/1996

तुम आए मेरी जिंदगी में,
तेरे आने पर गुजरे ये चार साल
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों के दामन में संजोये,
हमारी जिंदगी के ये चार साल

तनहा थे आवारा थे गुमनाम थे तेरे आने से पहले,
किनारे से भटकी कश्ती की पतवार थे तेरे आने से पहले
पतवार को माझी मिला और मांझी को रास्ता,
तब शुरू किए तेरे साथ सफर के ये चार साल
तुम आए मेरी जिंदगी में.

मुस्कुरा कर तुमने मुस्कुराहट दी मेरे होठों को,
हंसकर तुमने बहार दी मेरे बागों को
महक दी दो फूलों की ,
चहका दिया हर एक के दामन को
इन फूलों की मदहोशी में,
इक हंसी ख्वाब की तरह गुजरे ये चार साल
तुम आए मेरी जिंदगी में

दब जाती है कुछ खट्टी यादें,
तेरे मीठे अहसानो के नीचे
जिस तरह दब जाती थी,
मेरी झूठी नाराजगी तेरी सच्ची मुस्कानों के नीचे
बदल गए मेरे बीस सालों के मायने,
तेरे साथ गुजारे ये चार साल
तुम आए मेरी जिंदगी में

अफसोस कुछ भी ना दे सका,
तेरी कुर्बानियों का सिला मैं
सवाल थोपे बेमानी तुझ पर,
जवाब जिनका ना निकाल सका मैं
जिसको पूरा करना था बिन मांगे,
मांग कर भी ना पूरा कर सका है मैं
मैं भी दूँ कुछ फूल अपने दामन से,
इसी इच्छा में गुजरे ये चार साल
तुम आए मेरी जिंदगी में

आंसू ना आए तेरी आंखों में,
गम छु ना सके तेरी परछाई भी
फूल दे भगवान तुझे तेरी इच्छा का,
यही दुआ देकर अलविदा कह गए ये चार साल
तुम आए मेरी जिंदगी में तेरे आने पर गुजरे ये चार साल

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